एलटी ग्रेड विज्ञान भर्ती 2025: पद 1353, लेकिन प्रारंभिक परीक्षा में केवल 329 सफल – कारण, प्रभाव और आगे की रणनीति
उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए एलटी ग्रेड भर्ती 2025 का परिणाम कई मायनों में चौंकाने वाला रहा है। इस भर्ती के अंतर्गत विज्ञान विषय के कुल 1353 पद घोषित किए गए थे, लेकिन प्रारंभिक परीक्षा में मात्र 329 अभ्यर्थियों को ही सफल घोषित किया गया है। यह स्थिति न केवल अभ्यर्थियों बल्कि शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया पर भी कई सवाल खड़े करती है।
भर्ती प्रक्रिया और परिणाम की स्थिति
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती 2025 के तहत विज्ञान, संस्कृत, वाणिज्य और गृह विज्ञान विषयों की प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की गई थी। आयोग ने चारों विषयों के परिणाम जारी किए, जिनमें विज्ञान विषय का परिणाम सबसे अधिक चर्चा का विषय बन गया।
विज्ञान विषय में लगभग 1,02,953 अभ्यर्थी पंजीकृत थे और करीब 49,538 ने परीक्षा दी। इसके बावजूद मुख्य परीक्षा के लिए केवल 329 अभ्यर्थी ही सफल हुए। यह संख्या उपलब्ध पदों की तुलना में बेहद कम है।
कम सफलता के मुख्य कारण
कठिन प्रश्नपत्र और उच्च स्तर
प्रारंभिक परीक्षा का स्तर अपेक्षा से अधिक कठिन बताया जा रहा है। कई अभ्यर्थियों का मानना है कि प्रश्नों का पैटर्न पिछले वर्षों से अलग था।
न्यूनतम दक्षता अंक (कटऑफ)
आयोग द्वारा निर्धारित न्यूनतम योग्यता अंक प्राप्त करना कठिन रहा। कई उम्मीदवार पासिंग मार्क्स से थोड़ा पीछे रह गए।
सीमित मेरिट चयन
मुख्य परीक्षा के लिए केवल योग्य और उच्च अंक प्राप्त अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जिससे संख्या कम हो गई।
प्रतिस्पर्धा और तैयारी का स्तर
बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, लेकिन गुणवत्तापूर्ण तैयारी करने वालों की संख्या सीमित रही।
रिक्त पदों पर क्या असर पड़ेगा?
विज्ञान विषय में 1000 से अधिक पद खाली रहने की संभावना जताई जा रही है। यदि मुख्य परीक्षा में भी कम अभ्यर्थी सफल होते हैं, तो भविष्य में:
पुनः भर्ती या विशेष चयन प्रक्रिया हो सकती है।
वेटिंग लिस्ट या अतिरिक्त अवसर दिए जा सकते हैं।
शिक्षा संस्थानों में विज्ञान शिक्षकों की कमी बनी रह सकती है।
अन्य विषयों की स्थिति
वाणिज्य में 887 अभ्यर्थी सफल हुए हैं।
गृह विज्ञान में 2784 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए।
संस्कृत में भी पर्याप्त संख्या में उम्मीदवार मुख्य परीक्षा के लिए चयनित हुए।
यह तुलना दिखाती है कि विज्ञान विषय में सफलता प्रतिशत सबसे कम रहा है।
अभ्यर्थियों के लिए आगे की रणनीति
सिलेबस और पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र का गहन विश्लेषण करें।
कॉन्सेप्ट आधारित तैयारी और नियमित टेस्ट दें।
समय प्रबंधन और निगेटिव मार्किंग पर विशेष ध्यान रखें।
विषय की गहराई और एप्लिकेशन आधारित प्रश्नों पर अभ्यास बढ़ाएँ।
Post a Comment